New Year

*कितना अजीब है ना, दिसंबर और जनवरी का रिश्ता*
*जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा*

*दोनों काफ़ी नाज़ुक हैं, दोनो में गहराई है*
*दोनों वक़्त के राही हैं, दोनों ने ठोकर खायी है*

*यूं तो दोनों का है, वही चेहरा वही रंग*
*उतनी ही तारीखें और उतनी ही ठंड*

*पर पहचान अलग है दोनों की*
*अलग हैं अंदाज़ और अलग हैं ढंग*
 
*एक अन्त है, एक शुरुआत*
*जैसे रात से सुबह, सुबह से रात*
*एक में याद है, दूसरे में आस*
*एक को है तजुर्बा, दूसरे को विश्वास*

*दोनों जुड़े हुए है ऐसे, धागे के दो छोर के जैसे*
*पर देखो दूर रहकर भी साथ निभाते हैं कैसे !!!*
*जो दिसंबर छोड़ के जाता है, उसे जनवरी अपनाता है*
*और जो जनवरी के वादें हैं, उन्हें दिसम्बर भी निभाता है*

*कैसे जनवरी से दिसम्बर के सफर में 11 महीने लग जाते हैं*
*लेकिन दिसम्बर से जनवरी बस 1 पल में पहुंच जाते हैं*
*जब ये दूर जाते हैं, तो हाल बदल देते हैं*
*और जब पास आते हैं, तो साल बदल देते हैं*

*देखने में ये साल के महज़ दो महीने ही तो लगते हैं*
*लेकिन सब कुछ बिखेरने और समेटने का माद्दा रखते हैं*
*दोनों ने मिलकर ही तो बाकी महीनों को बांध रखा है*

*अपनी जुदाई को दुनिया के लिए एक त्यौहार बना रखा है*


Dec 31, 2018 Mukesh Kumar No comments 51


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